अमेरिका से करोड़ो की नौकरी छोड़ लौटा गांव, शुरू किया बिजनेस; आज है 600 करोड़ रुपये का मालिक

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जीवन में कोई भी काम बड़ा नहीं होता हम जीवन में कठिन से कठिन कार्य को कर सकते है वो तब मुमकिन है जब हम उस काम के प्रति तन और मन दोनों से लग जाये . जीवन में कई बार होता है की व्यक्ति अपने मन के मुताबित फील्ड में काम नहीं कर पाता जो इंसान को हमेशा पीछे धकेल देती है.

आज हम ऐसे व्यक्ति की बात कर रहे है जिसने माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनी की नौकरी छोड़ अपना खुद का एक स्टार्टअप शुरू किया जिसमे वो सफल भी हुए वो शख्स है दिल्ली के रहने वाले पीयूष बंसल. तो चलिये दोस्तों अब आगे जानते है पीयूष बंसल के स्टार्टअप के बारे.

शुरुआती संघर्ष
हम बात कर रहे है दिल्ली में रहने वाले पीयूष बंसल की. पीयूष बंसल ने एक ऐसे बिज़नेस की शुरुआत की थी जिसे पहले कभी आजमाया नहीं गया था. लेकिन पीयूष ने अपने इस स्टार्टअप को शुरू करने से पहले इसके सभी पहलुओं की अच्छे से जांच की और फिर शुरू कर दिया अपना ऑनलाइन चश्मा बेचने का बिज़नेस.

पीयूष बंसल ने साल 2010 में स्टार्टअप की शुरुआत की और इसे नाम दिया लेंसकार्ट – Lenskart अपने स्टार्टअप की शुरुआत में पीयूष को काफी संघर्ष करना लेकिन पीयूष ने कभी भी मुश्किलों के सामने हार नहीं मानी और उनकी मेहनत का ही नतीजा है की आज पीयूष बंसल की कंपनी लेंसकार्ट की नेट वर्थ 1000 करोड़ डॉलर से भी ऊपर है लेकिन पीयूष के दिमाग में ये आईडिया कब और कहां से आया वो भी हम आगे बताएंगे आज देश के सफल स्टार्टअप कारोबारियों की लिस्ट में टॉप आने वाले पीयूष बंसल के बारे और अधिक जानते है.

पिता नहीं चाहते थे बेटा करे ये काम
पीयूष का जन्म दिल्ली के एक शिक्षित परिवार में हुआ था. इनके पिता चार्टर्ड एकाउंटेंट थे पीयूष के पिता के हमेशा एक चाहत थी की उनका बेटा भी उनकी तरह पढ़ लिख कर एक बड़ा इंसान बने अपनी शुरुआती शिक्षा होने के बाद उन्होंने पीयूष को आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा भेज दिया वहां से पीयूष ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की इसके बाद पीयूष ने अपनी पहली नौकरी माइक्रोसॉफ्ट में की दुनिया की बड़ी कंपनी होने के कारण पीयूष को यहां लाखो का पैकेज मिल रहा था .

लेकिन वो इस काम से खुश नहीं थे और वो जिंदगी में एक खुद का स्टार्टअप शुरू करना चाहते थे और इसी सोच के साथ पीयूष साल 2007 में भारत आ गये. जब वो भारत आये तब उन्हें देख कर उनके पिता उनसे काफी नाराज हुए.

लेकिन पीयूष ने अपने पिता को अपने सारे विचार बताये और उनके पिता उनकी इस बात से सहमत हो गये और पीयूष अपने स्टार्टअप की शुरुआत करने में लग गये उनकी मेहनत और बिज़नेस के प्रति लगाव ही था जो उनके पिता इस कार्य के लिए मान गये.

उस दौर में भारत में ई-कॉमर्स एक कॉन्सेप्ट था और पीयूष को भी इस क्षेत्र में कुछ कुछ करना था. उन्होंने एक वेबसाइट का निर्माण किया सर्च मार्य कैंपस डॉट कॉम – Search My Campus.com अपनी पहली वेबसाइट उन्होंने छात्रों के लिए बनाई इसमें वो हॉस्टल से लेकर खिताबों ,और पार्ट टाइम जॉब के बारे में भी देख सकते थे.

1500 से ज्यादा आउटलेट
इस काम में वो सफल हुए लेकिन उनके उम्मीद के मुताबित नहीं ये सोचकर उन्होंने एक साथ चार वेबसाइट बनाई और उन पर काम शुरू किया ये वेबसाइट आईवियर, ज्वेलरी, घड़ी और बैग्स से संबंधित थी. लेकिन पीयूष ने इन चार वेबसाइट को सबसे ज्यादा अहमियत आईवियर को दी और उसमे उनको अपार सफलता भी मिली

आज पुरे भारत में लेंसकार्ट के 1500 से भी ज्यादा आउटलेट है. फ्रेंचाइजी मॉडल के बिज़नेस को अपनाते हुए पीयूष ने लेंसकार्ट का देश के हर क्षेत्र में विस्तार किया उनकी कंपनी आज आई चेकअप की भी सुविधा देती है.

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