अमेरिका से नौकरी छोड़कर लौटे गांव, बनाया बड़ा ब्रांड; आज खड़ी की 1.66 लाख करोड़ रुपये की कंपनी

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किसी भी व्यक्ति को एक दिन में सफलता नहीं मिलती. सफलता पाने के लिए लगातार मेहनत करनी पड़ती है तभी व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाता है. आज भी हम यहां ऐसी ही एक कंपनी के बारे में बात करने वाले है जिसको आज दुनिया भर में पसंद करा जाता है हम बात कर रहे है महिंद्रा एंड मोहम्मद कंपनी की. हालांकि अब यह ब्रांड महिंद्रा एंड महिंद्रा के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर है. लेकिन इस कहानी की शुरुआत महिंद्रा एंड मोहम्मद से ही होती है.

दो भाई, जिनके कंधों पर आ गई पूरे परिवार की जिम्मेदारी
जेसी और केसी महिंद्रा के कुल 9 भाई-बहन थे. दोनों भाइयों के सिर से छोटी सी उम्र में ही पिता का साया उठ गया था. पिता के जाने के बाद जेसी महिंद्रा के कंधों पर मां और 8 भाई-बहनों की जिम्मेदारी आ गई थी.

भले ही जेसी महिंद्रा की उम्र बहुत कम थी लेकिन उनके हौसले बुलंद थे और जेसी महिंद्रा की सोच दूरदर्शी थी. उन्होंने अपने साथ-साथ अपने भाई-बहनों के लिए भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने की पूरी कोशिश की. जेसी महिंद्रा ने अपने छोटे भाई केसी महिंद्रा को पढ़ने के लिए कैम्ब्रिज भेजा.

विदेश में नौकरी छोड़कर एमएंडएम कंपनी शुरू की
पढ़ाई पूरी करने के बाद केसी महिंद्रा ने अमेरिका में नौकरी करी. फिर इसके बाद साल 1942 में उन्हें अमेरिका में इंडियन परचेजिंग मिशन का प्रमुख नियुक्त किया गया.जब केसी 1945 में भारत लौटे तो उन्होंने अपने बड़े भाई जेसी महिंद्रा और दोस्त मलिक गुलाम मुहम्मद के साथ अपना नया व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया. इस तरह तीनों ने मिलकर 1945 में महिंद्रा एंड मुहम्मद कंपनी की नींव रखी.

देश के बंटवारे ने कंपनी को भी बांट दिया
इस कंपनी की शुरुआत एक स्टील कंपनी के तौर पर हुई थी. फिर देश के बंटवारे के बाद उनके सपने को भी बहुत ही बड़ा झटका लगा. 15 अगस्त 1947 को देश में बंटवारा होने के साथ ही महिंद्रा बंधुओं के सामने एक बहुत ही बड़ी मुश्किल आ चुकी थी. यहां धर्म के आधार पर देश को दो भागों में बांटा गया था. और वहां इस कंपनी के भी हिंदू-मुस्लिम दोस्त बंट गए थे. पाकिस्तान के गठन के साथ, मलिक गुलाम मुहम्मद ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया. वे अब एमएंडएम कंपनी से अलग होना चाहता था.

ऐसे महिंद्रा एंड मोहम्मद बनी महिंद्रा एंड महिंद्रा
मलिक गुलाम मोहम्मद के अलग हो जाने के बाद महिंद्रा बंधुओं ने अपनी कंपनी का नाम बदल देने का फैसला किया. लेकिन समस्या यह थी कि कंपनी पहले से ही एमएंडएम नाम से पंजीकृत थी. नाम बदलने में कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन कंपनी की स्टेशनरी बर्बाद हो रही थी.

कंपनी केवल एम एंड एम नाम ही चाहती थी. ऐसे में कंपनी का नाम मोहम्मद की जगह महिंद्रा रखा गया. और कंपनी का नाम महिंद्रा एंड मोहम्मद से बदलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा कर दिया गया. महिंद्रा बंधु अब अपनी कंपनी के साथ कुछ नया करना चाहते थे.

फिर इस कंपनी ने भारत में जीप का उत्पादन शुरू कर दिया था. इसके साथ ही स्टील कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने ऑटो इंडस्ट्री में कदम रखा था. जीप बनाने के कुछ समय बाद ही महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी ने हल्के वाणिज्यिक वाहनों और ट्रैक्टरों का निर्माण भी शुरू कर दिया. इसी तरह यह कंपनी बढ़ती चली गई.

यह कंपनी एसयूवी, हैवीवेट कमर्शियल व्हीकल, टू व्हीलर मोटरसाइकिल, मल्टी यूटिलिटी व्हीकल, पिकअप, लाइटवेट कमर्शियल व्हीकल, और ट्रैक्टर आदि कई वाहनों की निर्माता है. आज इस ग्रुप का कारोबार 100 देशों में फैला हुआ है. महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप ने 150 कंपनियों के साथ 2.5 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया है.

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