एक ज़माने में खेती कर चलाते थे घर, 700 रुपये से शुरू किया बिजनेस; आज खड़ा किया करोड़ो का बिजनेस

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आज बहुत कम लोग हैं जिन्हें नॉनवेज खाना पसंद नहीं है. नॉन वेज खाने के शौकीन हमेशा ही बढ़िया खाने के लिए बेताब रहते हैं. वे अलग-अलग स्वाद के होटलों की तलाश में हैं. पुणे में ऐसे कई होटल हैं जो मांसाहारी प्रेमियों के लिए वरदान हैं. आज हम एक ऐसे होटल की कहानी देखने जा रहे हैं जो सिर्फ पुणे में ही नहीं बल्कि कई इलाकों में नॉन वेज लवर्स का फेवरेट डेस्टिनेशन है. वह होटल का नाम है होटल जगदंबा.

पुणे से एक घंटे की ड्राइव पर पुणे-बेंगलुरू राजमार्ग पर शिवपुर में होटल जगदंबा ग्राहकों से भरी हुई है. ग्राहकों की लंबी कतारें होती हैं, खासकर खाने के समय और सप्ताहांत में. होटल ग्रेवी और प्लेट में बेस्ट सेलर के तौर पर जाना जाता है. यहां आप चिकन-मटन डिश ऑर्डर कर सकते हैं.

प्रत्येक थाली में असीमित ग्रेवी, चावल, ज्वार या रोटी, और तला हुआ मटन होता है. थाली की खासियत यह है कि इसमें घी का ज्यादा इस्तेमाल होता है और चावल भी स्वादिष्ट होते हैं. इस होटल के जन्म की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. 700 रुपये से शुरू हुआ इस होटल का सफर आज करोड़ों तक पहुंच गया है. आइए अब इस होटल और इसके मालिक के बारे में जानते है.

इस होटल के मालिक गणेश पायगुडे है. जिन्होंने 10 साल पहले इस होटल को शुरू किया था. गणेश एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं. वह खेती करता था और अपने घर में दूध का बिजनेस था. जब वह अपने डिप्लोमा की पढाई कर रहे थे, तब उन्हें अपने परिवार को आर्थिक मदत करने के लिए एक होटल शुरू करने का विचार आया. जब उन्होंने होटल शुरू किया तो उनकी योजना सामने सिर्फ चीनी और बीयर की दुकान रखने की थी. लेकिन लाइसेंस के अभाव में बीयर की दुकान शुरू नहीं हो सकी. गणेश को उनके पिता ने जमीन की बिक्री से 7 लाख रुपये की पूंजी दी थी.

गणेश ने अन्य होटलों की तरह 2-3 साल तक उसी पंजाबी ग्रेवी में खाना परोसा. लेकिन एक घटना ने उनके होटल को एक अलग ही पहचान दी. हुआ यूँ कि हर साल वह देवी के मंदिर में बकरी का वध करते थे. हालांकि, उस वर्ष देवी के मंदिर में आग लग गई, और वहां किसी भी बकरी को वध करने की अनुमति नहीं थी.

तो परिजन उसे लेकर गणेश के होटल आ गए और वहां उन्होंने घर का बना खाना बनाया. उनकी मां ने घर के सभी मसालों का इस्तेमाल किया. उसका स्वाद इतना बढ़िया था कि एक रिश्तेदार ने उससे पूछा कि उसने ऐसा खाना होटल में क्यों नहीं रखा. यही टर्निंग प्वॉइंट था और वे होटल में ब्लैक ग्रेवी मटन ब्रेड रखने लगे.

आज ग्राहकों को होटल में खाने के लिए 1-2 घंटे इंतजार करना पड़ता है. और वे इंतजार भी करते है . गणेश का कहना है कि होटल में अब तक कई कॉमेडी कहानियां हो चुकी हैं. एक समय, कुछ लोगों ने अपने पासपोर्ट दिखाए और एक होटल में प्रतीक्षा करने से बचने के लिए सरकारी अधिकारी होने का नाटक किया. आज गणेश का टर्नओवर करोड़ों तक पहुंच गया है. उनके होटल व्यवसाय को कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है.

होटल जगदंबा में कई बड़ी हस्तियां भी रात के खाने के लिए आती हैं और राजनीतिक नेता भी उनके होटल का स्वाद चखने आते हैं. गणेश कहते हैं कि जब 10 साल पहले होटल शुरू हुआ था तो मैं एक लीटर तेल लाता था जिसे मैं अपनी डायरी में लिख कर रखता था. आज वे एक बार में 5 टन तेल लाते हैं.

पिछले १-2 साल में होटल कारोबार पूरी तरह ठप हो जाने से जगदंबा होटल को भी भारी नुकसान हुआ. तब गणेश पायगुडे ने सोचा कि जैसे हम कृषि में अन्य साइड बिजनेस करते हैं, वैसे ही उन्होंने होटल में साइड बिजनेस के रूप में राइस मिल भी शुरू की. उन्होंने अपनी मां के नाम पर इंद्रायणी चावल का ब्रांड भी बनाया है. क्योंकि अक्सर ग्राहक चावल मांगते थे जो उनके होटल में होता है. इसलिए उन्होंने अरुणाई इंद्रायणी चावल शुरू किया.

पूरे महाराष्ट्र में नॉनवेज के लिए मशहूर जगदंबा के मालिक गणेश पायगुडे के बारे में एक चौंकाने वाली बात खुद की वह खुद नॉन वेज नहीं खाते. उन्होंने अपने जीवन में कभी भी एक साधारण अंडा तक नहीं खाया है. उनके बच्चे और पूरा परिवार वेजिटेरियन हैं. उनके द्वारा लगाया गया यह छोटा सा पेड़ आज बरगद का पेड़ बन गया है.

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