एक समय पर साइकिल के टायर बेचने का करते थे काम, आज है 4000 करोड़ की कंपनी के मालिक

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साइकिल टायर के निर्माण से शुरू हुआ उनका सफर आज भारत के दूसरे सबसे बड़े टायर निर्माता के रूप में पहुँच चूका है. बिज़नेस फॅमिली से आने वाले इस उद्यमी ने अपने पिता से विरासत में मिले टायर, पेपर और टेक्सटाइल बिज़नेस को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है.

कारोबारी परिवार से आने वाले इस उद्यमी ने अपने पिता से विरासत में मिले टायर, कागज और कपड़ा कारोबार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. आपको जानकर बहुत हैरानी होगी कि कभी ऑटो और साइकिल के लिए टायर बनाने वाली कंपनी आज बहुत ही भारी उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले टायर बना रही है. जेसीबी और जॉन डेरे जैसे बड़े नामों के साथ भी जुड चुकी है.

बीकेटी टायर देश का दूसरा सबसे बड़ा टायर ब्रांड बन चूका है और इस कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने वाले उद्यमी अरविन्द पोद्दार हैं. पोद्दार परिवार की टेक्सटाइल बाजार में बहुत ही खास पहचान है. कपड़ा उद्योग से शुरू हुआ सफर कागज उद्योग तक पहुंचा और फिर टायर उद्योग में भी सफल कदम रखा.

अरविन्द पोद्दार ने न केवल भारत में बल्कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और इटली जैसे देशों में भी अपनी रणनीतिक सूझबूझ और कारोबारी समझ से बीकेटी टायर्स की स्थापना की है. आज उनकी कंपनी दुनिया के सौ से अधिक देशों में टायरों का निर्यात कर रही है. भले ही उनका भारत में ऐसा नाम न हो, लेकिन विदेशों में इस कंपनी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है.

बीकेटी टायर के कुल राजस्व का अस्सी प्रतिशत निर्यात से आता है. जबकि घरेलू बाजार से 20 फीसदी. कंपनी के साथ करीब 8000 कर्मचारी काम करते हैं. अरविंद पोद्दार का जन्म एक कारोबारी परिवार में हुआ था और अरविन्द पोद्दार के पिता पहले से ही टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम कर रहे थे. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद, अरविन्द पोद्दार ने अपने पिता के साथ व्यवसाय करना शुरू कर दिया.

साल 1987 में, उन्होंने साइकिल टायरों के निर्माण के लिए बालकृष्ण इंडस्ट्रीज की नींव रखी. गुणवत्ता और उचित कीमतों के कारण उन्हें जल्द ही टायर व्यवसाय में सफलता मिली. फिर उन्होंने ऑटो और कार के टायर बनाने शुरू किए.

उन्होंने पहला ट्रैक्टर टायर बनाने का फैसला करा. मगर उनका लक्ष्य भारी मशीनरी के लिए टायर बनाना था. इस वजह से उन्होंने कृषि के साथ-साथ निर्माण, खनन और परिवहन में उपयोग होने वाली मशीनों के टायर बनाना उचित समझा. समय के साथ, प्रौद्योगिकी के उपयोग और अपनी विनिर्माण इकाई के विस्तार के साथ, बीकेटी ने बाजार में बढ़ी हुई मांग को संभाला.

फिर अरविंद पोद्दार ने विदेशों में अपनी ब्रांड छवि बनाने के लिए खेल और आक्रामक रणनीति का सहारा लिया वह मॉन्स्टर जैम को प्रायोजित करते, जो की एक बहुत ही लोकप्रिय भारी ट्रक रेसिंग कार्यक्रम है. और इटली में फुटबॉल टीम का मुख्य प्रायोजक बन गए.

आज के समय में उनकी कंपनी भारत में एक ग्लोबल ब्रांड बन गई है और मारवाड़ी कारोबारी घराने की कारोबारी समझ ने उन्हें देश-विदेश में कामयाबी दिलाई. पोद्दार परिवार की अगली पीढ़ी भी बीकेटी में शामिल हो गई है अब अरविंद के बेटे राजीव पोद्दार भी पिता के साथ कारोबार को आगे बढ़ाने में लगे हैं.

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