ऑस्ट्रेलिया से लौटे गांव, दिमाग में था धमाकेदार आइडिया, आज खड़ी कि 90 करोड़ रुपये की कंपनी

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क्या आपको बर्फ के पॉप्सिकल्स याद हैं जिन्हें आप अपने स्कूल के दिनों में बड़े चाव से खाते थे? रवि काबरा और अनुजा काबरा की जुबान पर पॉप्सिकल्स का स्वाद था और उनसे जुड़ी कुछ खास यादें भी. और यही वजह है कि रवि काबरा और अनुजा काबरा ने बचपन की उन यादों को एक ब्रांड के साथ बाजार में लाने का फैसला करा. उन्होंने अपने स्टार्टअप का नाम स्किप्पी आइस पॉप्स रखा.

महामारी के चलते रवि काबरा और अनुजा काबरा को भी बाकियों की तरह मजबूरी में घर बैठना पड़ा. महज एक महीने चली उनकी फैक्ट्री एक साल बंद रही और उन्हें 11 लाख का नुकसान हुआ.

इसी बीच रवि काबरा और अनुजा काबरा ने टेलीविजन शो ‘शार्क टैंक इंडिया’ में हिस्सा लेने का फैसला किया और यहीं से उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया. तो आइए जानते हैं कैसे इन दोनों ने शुरू करी थी यह कंपनी.

खुद की कंपनी शुरू करने का था सपना

कई कंपनियों में काम करने के बाद उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने का फैसला किया. अनुजा कहती हैं, “जब हमने करियर में आगे बढ़कर खुद का बिजनेस शुरू करने का फैसला किया, तो हमारे दिमाग में पहले से ही आइस पॉप्सिकल्स का आईडिया था. एक बार मेरी बहन ऑस्ट्रेलिया से भारत में आ रही थी. उसने अपने साथ ले जाने के लिए बहुत सारे बर्फ के पॉप्सिकल्स पैक किए थे.”

उन्होंने कहा, “उस समय मुझे भारतीय बाजार में इसकी कमी और ब्रांड की कमी का एहसास हुआ. काफी खोजबीन के बाद हमें पता चला कि माता-पिता को अपने बच्चों को पॉप्सिकल्स चखने के लिए एक भरोसेमंद ब्रांड की काफी ज्यादा जरूरत है. फिर हमने मार्च 2020 में बिना किसी कृत्रिम स्वाद के स्किप्पी को लॉन्च करने का फैसला किया.”

अनुजा कहतीं हैं “शुरू-शुरू में वे आम, नींबू, संतरा, और रसभरी कोला समेत लगभग छह स्वादों के साथ मार्किट में आए थे. अपने प्रोडक्ट में वे सिर्फ प्राकृतिक रंग, प्रिजर्वेटिव और स्वीटनर का इस्तेमाल करते हैं. फलों और सब्जियों से इसके लिए फ्लेवर निकाले जाते हैं.”

अनुजा का कहना है कि शुरुआत में वे इसे रसभरी कोला, आम, संतरा, और नींबू सहित छह स्वादों के साथ इसे बाजार में लाए थे. वे अपने उत्पादों में केवल प्राकृतिक रंगों, परिरक्षकों और मिठास का उपयोग करते हैं. इसके लिए सब्जियों और फलों से इसके फ्लेवर को निकाले जाते हैं.

क्यों भाया यह प्रोडक्ट शार्क टैंक के निवेशकों को

शार्क टैंक के निवेशकों को प्रभावित करना बिलकुल भी आसान नहीं था. रवि और अनुजा को 66,000 उम्मीदवारों के साथ पांच राउंड से गुजरना पड़ा. इसके बाद वह निवेशकों का दिल जीतने में कामयाब रहे. पहला राउंड टेलीफोन इंटरव्यू का था. फिर प्रलेखन और वीडियो पिच और एक ऑडिशन.

अब बदल चूका है पूरा जीवन

शार्क टैंक के बाद रवि काबरा और अनुजा काबरा की जिंदगी में काफी बदलाव आया है. रवि कहते हैं, “हमें सिर्फ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए रातों-रात 21,000 ऑर्डर प्रोसेस करने पड़े. हमें निवेशकों और वितरकों से हजारों अनुरोध मिल रहे हैं. एक समय मैंने 800 लोगों के साथ वीडियो कॉल करी क्योंकि मेरे पास उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने का समय बिलकुल भी नहीं था.”

वर्तमान की बात करे तो इस कंपनी की पहुंच पांच राज्यों में है और इस साल उनका राजस्व 4 करोड़ रुपये रहा है कंपनी का लक्ष्य 2023 तक 30 करोड़ का राजस्व हासिल करना है और आने वाले पांच सालों में वो इस आंकड़े को 100 करोड़ तक ले जाना चाहते हैं.

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