कपडे की दुकान में झगड़ा न होता तो योगीजी आज राजनीति में नहीं होते, आज दूसरी बार बने मुख्यमंत्री

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योगी आदित्यनाथजी ने कुछ दिनों पहले ही दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. योगीजी ने उत्तर प्रदेश चुनाव में अभूतपूर्व सफलता के साथ दूसरी बार पद जीता. उनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) के पौड़ी जिले के यमकेश्वर तालुका के पंचूर नामक एक छोटे से गाँव में हुआ था. स्नातक की पढ़ाई के दौरान, वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हो गए. वहां से वे गोरक्षनाथ मंदिर के महंत अविद्यानाथ के संपर्क में आए और वहां उन्होंने दीक्षा ली.

योगी आदित्यनाथजी का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है. उन्होंने 1994 में अविद्यानाथ महाराज से दीक्षा लेने के बाद अपना मूल नाम छोड़ दिया. इतना ही नहीं चुनाव लड़ने के दौरान हलफनामे में उनके पिता के नाम के आगे वाले कॉलम में अवैद्यनाथ का नाम भी लिखा होता है. योगी आदित्यनाथजी आज संत परंपरा के अनुसार अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं और वे गोरक्षपीठ के अध्यक्ष हैं. यह पीठ सनातन धर्म के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है.

27 साल पहले एक कपड़े की दुकान में हुआ था झगड़ा

मार्च 1994 में गोरखपुर के गोलघर बाजार स्थित गोरखनाथ मंदिर ट्रस्ट के एमपी इंटर कॉलेज के कुछ छात्र कपड़े की दुकान पर खरीदारी करने गए थे. कीमत को लेकर बातचीत और लड़ाई छिड़ गई. कहा-सुनी इतनी तेज थी कि दुकानदार ने रिवॉल्वर निकालकर दो राउंड फायरिंग की.

वहासे लड़के भाग गए. अगले दिन पुलिस छात्रों को पकड़ने के लिए गोरखनाथ मंदिर ट्रस्ट के प्रताप छात्रावास पहुंची, लेकिन वे नहीं मिले. लौटने की धमकी देकर पुलिस चली गई. अगले दिन सुबह 10 बजे भयभीत छात्र गोरखनाथ ट्रस्ट पहुंचे. घटना की जानकारी दी. ट्रस्ट ने 22 वर्षीय साधु को बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी सौंपी.

अगले दिन एक युवा साधु के नेतृत्व में पूरे गोरखपुर में 50 से अधिक बच्चों ने विरोध करना शुरू कर दिया. मांग थी कि दुकानदार को गिरफ्तार किया जाए. विरोध करते हुए छात्र गोरखपुर एसएसपी के आवास के पास पहुंच गए. वहां, भगवा पहने एसएसपी आवास की दीवार पर चढ़ गए क्योंकि पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने की कोशिश की. वह ऊपर से जोर-जोर से चिल्लाने लगा.

उस युवा साधु के साहस को देखकर लोग दंग रह गए. उसका नाम पूछ रहा था. किसी ने कहा ‘योगी आदित्यनाथ’. उस दिन से, युवा योगी, जो ऐसी दुर्दशा में थे, मदद के लिए आदित्यनाथ के पास आने लगे.

अपने काम के लिए मशहूर हुए योगीजी, लोगों ने बनाया एमपी

योगीजी छात्रों की मदद के लिए इतने प्रसिद्ध हुए कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र नेता उनके पास आने लगे. वह पहले से ही गोरखनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी थे. वे मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर फले-फूले. चार साल बाद 1998 में महंत अविद्यानाथ ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया.

दरअसल, अविद्यानाथ गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद थे. भाजपा ने राजनीति छोड़ने के बाद उनके शिष्य योगी आदित्यनाथजी को उसी सीट से टिकट दिया और 26 वर्षीय योगी 12वीं लोकसभा में सबसे कम उम्र के सांसद बने. उन्होंने पहला चुनाव 26,000 मतों से जीता था. योगीजी ने 1999, 2004, 2009 और 2014 में चुनाव जीतना जारी रखा. आज, वह यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं.

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