कभी करते थे मजदूरी, डब्ल्यूडब्ल्यूई में जाकर देश का नाम किया रोशन, आज 100 करोड़ के है मालिक

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डब्ल्यूडब्ल्यूई में अंडरटेकर से लेकर बिग शो जैसे पहलवानों को धूल चटाने वाले द ग्रेट खली ने फर्श से लेकर अर्श तक का यह सफर तय करा है. उनके लिए सफल होना आसान बिलकुल भी नहीं था.

द ग्रेट खली जीवनी

द ग्रेट खली का जन्म हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के सिराइना गांव में एक गरीब पंजाबी राजपूत परिवार में हुआ था. उनके पिता ज्वाला राम एक किसान थे और मां तंदी देवी हाउस वाइफ़ थीं, जो खेती में अपने पति की मदद करती थीं. द ग्रेट खली का माथा, नाक, ठुड़ी और कान बचपन में गिगेंटिज्म नामक बीमारी से पीड़ित होने के कारण असामान्य रूप से बड़े हो गए थे. जिसके कारण वह अपने सात भाई-बहनों और परिवार से अलग थे.

इस तरह हुई थी शुरुआत

जब उन्होंने अपने कठिन संघर्ष की कहानी सुनाई तो वह भावुक हो गए. खली ने बताया कि अभ्यास के दौरान वह कई बार रिंग में ही सो जाते होते थे. जब वे पहली बार भारत से अमेरिका आए तो उनके पास पैसे भी नहीं थे खली ने बताया कि जब मुझे वर्ष 1994 में पंजाब पुलिस में बहाल करा गया तो मैंने कुछ जवानों को कैंपस में एक्सरसाइज करते हुए देखा. तब मैंने मेरे मित्रों से पूछा कि ऐसा करने से क्या लाभ है तो उन्होंने भी मजाक में कहा कि पद बढ़ता है, प्रमोशन भी होती है, यह बात मेरे दिमाग में बस गई और मैंने भी व्यायाम करने का फैसला किया. धीरे-धीरे मुझे बॉडी बिल्डिंग में बहुत मजा आने लगा.

पैसे नहीं थे फिर भी नहीं मानी हार

खली ने बताया कि जब उनकी बॉडीबिल्डिंग में दिलचस्पी बढ़ने लगी थी तब साल 2000 में उन्होंने यूएसए का रुख करा. यहां पहुंचकर उन्होंने कुश्ती की ट्रेनिंग लेने का फैसला किया. मगर उनके पास न तो पैसा थे, न घर, न ही कार. यस और नो के अलावा उनको अंग्रेजी भी नहीं आती थी. वह जहां प्रैक्टिस करते थे, वहीं सो जाते थे. एक साल बाद वे 2001 में अमेरिका से जापान गए. 2003 तक वहीं रहे और यहां डब्ल्यूडब्ल्यूई के लिए उनकी उत्सुकता बढ़ी.

खली ने बताया कि दौलत, शोहरत और प्रतिष्ठा की भूख ने उन्हें रिंग में ला दिया. जब वे पहली बार जिम गए थे तो वेट लिफ्टिंग मशीन को देखकर बहुत डर गए थे. मगर जब ट्रेनर ने बताया तो डर दूर हो गया. खली ने अपनी शादीशुदा जिंदगी के बारे में बात करते हुए बताया कि 16 साल पहले उन्होंने हरमिंदर कौर उर्फ ​​गुड्डी से लव मैरिज कर ली थी. वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ चार-पांच महीने में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के अपने गांव आते-जाते रहते थे.

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