कभी पति को 10 हजार रुपये देकर शुरू किया था बिजनेस, आज चलाते है 1 लाख करोड़ रुपये की कंपनी

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जिंदगी में कई महिलाएं प्रेरित करने के लिए ही पैदा होती हैं. सरोजनी नायडू, मदर टेरेसा, या फिर कल्पना चावला, महिलाएं हमेशा से ही प्रेरणा का स्रोत रही हैं और उनमें से एक नाम है सुधा मूर्ति का जिन्होंने भारतीय समाज पर काफी प्रभाव डाला है.

परोपकारी, एक लेखक, और उद्यमी सुधा मूर्ति एक लेखक होने के साथ-साथ ही, गरीब बच्चों की शिक्षा की सुविधा देने वाली और भारत की अग्रणी आईटी कंपनी इंफोसिस की सफलता के लिए काफी ज्यादा सम्मानित भी हैं.

सुधा मूर्ति की जीवनी

सुधा मूर्ति का जन्म 19 अगस्त 1950 को कर्नाटक के शिगगांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ. सुधा मूर्ति के पिता डॉ आरएच कुलकर्णी सर्जन थे और सुधा की मां का नाम विमला कुलकर्णी था. परिवार में पढ़े-लिखे माहौल ने उनमें कम उम्र में ही कुछ असाधारण करने का जज्बा पैदा कर दिया.

उनकी शिक्षा ने उन्हें एक सफल लेखक के रूप में आकार दे देने में बहुत ही प्रमुख भूमिका निभाई थी, सुधा मूर्ति की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता इस बात से जाहिर होती है कि वह अपनी स्नातक और मास्टर डिग्री के दौरान एक टॉपर के रूप में उभरी.

उन्होंने बीवीबी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, हुबली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई पूरा करा था. फिर सुधा मूर्ति ने उच्च अध्ययन के विकल्प पर विचार करा और साल 1974 में भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर से कंप्यूटर विज्ञान में एमई कर लेने के लिए आगे बढ़ीं.

सुधा मूर्ति एक लेखक के रूप में

लेखन के प्रति उनका जुनून सुधा के मनोरंजन के स्रोतों और उनके शिक्षाविद माता-पिता की कमी का परिणाम था. उन्होंने बहुत कम उम्र से ही पढ़ने-लिखने की शुरुआत कर दी थी. उनकी माँ के निर्देशन और मनोरंजन के रूप में लेखन शुरू हुआ.

29 वर्ष की आयु में, सुधा ने अपनी पहली पुस्तक प्रकाशित करने के लिए अकेले ही यू.एस.ए. की यात्रा करी थी. उन्होंने अपनी पहली किताब अपने पति सह मित्र नारायण मूर्ति को समर्पित करी है. कई पुस्तकों का अंग्रेजी में अनुवाद भी करा जा चूका है और कई का टीवी श्रृंखला में अनुवाद करा जा चूका है.

इंफोसिस फाउंडेशन की शुरुआत

इंफोसिस फाउंडेशन जैसी बड़ी कंपनी की चेयरपर्सन और ट्रस्टी भी सुधा मूर्ति हैं. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स के साथ, सुधा मूर्ति ने साल 1996 में इंफोसिस फाउंडेशन की शुरुआत कर दी थी. सुधा मूर्ति ने फाउंडेशन के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में करीब 2300 से भी ज्यादा घर बनाए हैं. वे सार्वजनिक स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कला और संस्कृति और गरीबी उन्मूलन को भी कवर करती है. सुधा मूर्ति ने स्कूलों में 16,000 शौचालय, 7000 पुस्तकालय, भी बनवाए हैं. इन सभी कार्यों के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं.

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