कभी फुटपाथ पर गुजारे थे दिन, मंगलसूत्र गिरवी रखकर पूरी की पढाई; आज है करोड़ों का बिजनेस

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उसने अपने 3 महीने के बेटे को अपने पास रखा, हालाँकि उसके पास पीने के लिए तक कुछ नहीं था. वह दिन रात सड़क पर भूखी सोती रही. मंगलसूत्र को गिरवी रखकर पढाई करनेवाली महिला, जिसने सड़क किनारे एक टेबल पर 10 रुपये में मसाला बेचकर आज करोडो रुपयों की कंपनी के मालिक होने का आश्चर्यजनक सफर तय किया है. आइए जानें शुन्य से दुनिया बनाने वाली इस महिला की पूरी जीवन यात्रा.

सुषमा कोलवणकर एक ऐसी महिला हैं जिसने खुद की दुनिया बनाई हैं. सुषमा के जीवन में बचपन से ही संघर्ष रहा. दसवीं तक उसे यह तक नहीं पता था कि घरपर पिता भी होते है. क्योंकि सुषमा ने कम उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था. परिवार में केवल मां और बहन. दस साल की उम्र में शादी के लिए उसे देखने मेहमान आते थे. स्कूल यूनिफॉर्म पहने और हाथ में बैग लिए सुषमा जब बड़ों का आशीर्वाद लेने गई तो उन्हें एक कुर्सी पर बैठकर सवाल पूछने को कहा गया. सामने लड़का और उसकी मां बैठे थे. यह उसके लिए चौंकाने वाला था. उसे यह जानने के लिए पर्याप्त समज भी नहीं थी.

उसने उस स्थिति का सामना किया. दादाजी ने बताया कि मेरी बेटी अभी भी सीखना चाहती है. इसलिए शादी नहीं हुई. वह दुखी थी कि तब उसके पिता नहीं थे. सुषमा पढाई में होनहार थी. दसवीं कक्षा तक पहले क्रमांक से पास करती थीं. 10 वि में तो वह उम्ब्रज के केंद्र में प्रथम आई. लेकिन पहले आ भी जाएं तो पूछने वाला कोई नहीं था. चूंकि कोई पिता या भाई नहीं था, इसलिए मां पर यह तय करने का दबाव था कि दोनों बेटियों की शादी कब की जाए. बेटी की जिम्मेदारियों को खत्म करने के लिए मां पर भावनात्मक रूप से दबाव डाला गया. पिता नहीं हैं तो लड़कियों को पढ़कर क्या मिलेगा ऐसे ताने रिश्तेदार मारते थे.

दसवीं में शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया गया लेकिन ग्यारहवीं और बारहवी में विवाह प्रस्ताव सुषमा के पास आया. अंत में १२ वी में घर के दबाव के चलते सुषमा शादी के लिए राजी हो गई. लेकिन किस्मत उनके साथ थी और शादी कैंसल हो गयी. उसने 12वीं साइंस के बाद डॉक्टर बनने का सपना देखा था. लेकिन अपनी हैसियत देखकर सपने देखने चाहिए ऐसा उसे सुनना पड़ता था. बचपन से ही उसने कुछ करने का सपना देखा था क्योंकि कोई भी उसके करीब नहीं रहना चाहता था. चूंकि उम्ब्रज में कोई साइंस कॉलेज नहीं था, इसलिए उसे कराड या सातारा जाना पड़ा. घर के हालात के चलते कराड कोई नहीं रखने वाला था.

सुषमा को सातारा के आर्मी हॉस्टल में रियायती दर पर एडमिशन मिला. उसने विज्ञान में प्रवेश किया. कॉलेज शुरू था तभी बहन ने कहा कि आपका कॉलेज पूरा करने के बाद आपकी शादी की व्यवस्था की जा रही हैं. सब फिक्स हुआ हैं. उसे कॉलेज में कई लड़कों ने प्रपोज किया था लेकिन समाज और बहन और मां की वजह से उसने मना कर दिया. लेकिन घर से शादी के दबाव को देखते हुए उसने एक लड़के को हां कर दी और लव मैरिज कर ली. उसे एक लड़का मिला था जो उसे समझता था. शादी के पहले साल में सुषमा को एक बेटा हुआ. सुषमा को शिक्षा मिल रही थी लेकिन सपना अभी दूर था.

वह फिर से सपने की ओर चलने लगी. वह अपने 3 महीने के बच्चे के साथ बाहर पड़ी. उसने एक कमरे से दुनिया की शुरुआत की. इससे पहले उसने 3 दिन अपने बच्चे के साथ एक दुकान में बिताये थे. पीने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं था. उसकी लव मैरिज में किसी ने उसकी मदद नहीं की. एक एक चीजे जमा कर उन्होने संसार जमाया. पड़ोसियों ने जरूरत का सामान देकर उनकी काफी मदद की. इसके बाद वह ट्यूशन लेने लगी. उन्होंने एक छोटी सी दुकान भी लगा रखी थी. वह भी चलाती थी.

दुकान नहीं चल रही थी, इसलिए उसका पति जॉब करता था. घर और ट्यूशन की देखभाल वह करती थी. दोपहर में जब दुकान बंद रहती थी तब उसने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया. वह कपड़े सिलने लगी. ऐसे ही 3 साल बीत गए. वह 500-1000 रुपये नहीं कमा पाती. बाद में तमाम विरोधों के बावजूद उन्होंने एमबीए किया. उसने लोन के साथ एमबीए की फीस का भुगतान किया. कर्ज की किस्त भरने के लिए वह सुबह 6-10 और कॉलेज में 10-6 काम करती थी. एमबीए फर्स्ट ईयर में पास हुआ था लेकिन सेकेंड ईयर में एडमिशन के लिए पैसे नहीं थे. उसने मंगलसूत्र को गिरवी रखकर आगे प्रवेश किया. एमबीए पूरा किया.

उसे अच्छी नौकरी मिली लेकिन वह अपने लिए कुछ करना चाहती थी. पति और उसने एक साथ नौकरी छोड़ दी और वे दोनों पुणे आ गए. उसे एक लाख रुपये महीने की नौकरी मिली थी. वह नौकरी छोड़कर वह बहार निकली थी. उनकी एक बेटी भी हुई थी. बेटी के साथ बिजनेस भी शुरू हुआ. बिजनेस यह था वह बाजार से मसाले लेकर आती थी और उन्हें अपनी ब्रांडिंग के तहत बेचना शुरू कर दिया. 10 रुपये का एक मसाला पैकेट उन्होंने सड़क किनारे टेबल लगाकर बेच दिया. उसे इससे कभी शर्म नहीं आई. 10 लाख रुपये के पैकेज की कमाई करने वाली सुषमा सड़क पर बैठकर 10 रुपये का मसाला बेचती थीं.

उसने मसाले का कारोबार शुरू किया. मसालों को दूसरे देशों में भेजा जाने लगा. साथमे सब्जियों और फलों का निर्यात भी शुरू कर दिया. उसने एक संस्थान में प्रशिक्षण भी शुरू किया. उनकी कंपनी आज ट्रेनिंग और कंसल्टेंसी में काम करती है. एक टेबल और 2 कुर्सियों से शुरू होकर आज उनका धंधा पूरे देश में फैल गया है. सुषमा को बिजनेस शुरू करने के 6 महीने के अंदर ही पुणे में एक घर खरीद लिया. खाली पेट 1 कमरे के कमरे से शुरू हुआ सुषमा का कारोबार अब करोड़ों का कारोबार कर रहा है.

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