कभी बाजार में बेचते थे कैलकुलेटर, अब कर रहे है युवाओं को आईएएस और आईपीएस अफसर बनाने का काम

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कहा जाता है कि लोगों का समय खराब हो सकता है मगर उनकी किस्मत नहीं, क्योंकि समय अच्छा हो या फिर बुरा, वह एक दिन बीत ही जाता है. मगर हर शख्स की किस्मत अच्छी होती है, एक क्षण में दुख है तो फिर अगले क्षण सुख है. ऐसे ही एक शख्स हैं डॉ. विकास द्विव्यकीर्ति जो कभी सेल्समैन का काम करते थे और आज देश के युवाओं को वे आईएएस और आईपीएस बना रहे हैं. युवाओं के बीच विकास काफी मशहूर हैं क्योंकि उनके पढ़ाने के तरीके के साथ-साथ मजाकिया अंदाज और चीजों को समझाने का तरीका काफी अलग है, जो उन्हें हर शिक्षक से अलग बनाता है.

विकास दिव्‍यकीर्ति का जन्म
पंजाब राज्य के रहने वाले डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जन्म 1973 में हुआ था. साल 1996 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी. वह बताते हैं कि उनका यूपीएससी का सफर बहुत दिलचस्प रहा था. क्योंकि उन्होंने किसी को यह नहीं बताया था कि वह यूपीएससी में भी अपनी किस्मत आजमा रहे है.

साल 1996 को उन्होंने पहली बार में ही उन्होंने प्रीलिम्स पास किया और मुख्य परीक्षा के लिए बैंगलोर के केंद्र का चयन किया और हर परीक्षा में वह दिल्ली से बेंगलुरु की फ्लाइट से जाते होते थे और फिर परीक्षा देकर तुरंत वापिस आ जाते थे.

महज 24 वर्ष की उम्र से दे रहे है यूपीएससी के छात्रों को शिक्षा
दृष्टि जिसे आईएएस और आईपीएस के लिए सबसे महत्वपूर्ण संस्थान माना जाता है, इसके संस्थापक भी डॉ. विकास दिव्यकीर्ति हैं. उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली थी. मगर इस दौरान उन्हें काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा, उन्होंने कई लोगों से पैसे उधार ले रखे थे.

वे चाहते थे कि वह ज्वाइन करने से पहले सारे उधर लिए हुए पैसे वापिस कर दें. इसके लिए उन्होंने साल 1998 में साढ़े 24 साल की उम्र में यूपीएससी के उम्मीदवारों को ट्यूशन देना शुरू कर दिया.

दिव्‍यकीर्ति रह चुके हैं राजनीति का भी हिस्सा
दिव्यकीर्ति ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करी फिर उसके बाद उनके पिता की इच्छा थी कि वे सीएम से भी बड़े और बेहतर नेता बनें. इसी वजह से विकास ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हो गए.

प्रथम वर्ष के अंत में वह ऐसी दुविधा में फंस गए कि उन्हें डीयू के छात्र संघ चुनाव से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होंने अपने छात्र जीवन को भी बहुत अच्छे से बिताया, वे डिबेट और कविता जैसी चीजों में भी हमेशा आगे रहते थे. हिस्ट्री ऑनर्स की डिग्री का पहला साल खत्म हो गया और वे सेल्समैन की नौकरी करने लगे.

उन्होंने दिल्ली में ही कैलकुलेटर बेचना शुरू कर दिया, लेकिन वह इस काम पर ज्यादा देर तक ध्यान नहीं लगा सके. वे अपने छोटे-छोटे खर्चे डिबेटिंग से निकाल लेते थे, मगर वे कुछ अच्छा ढूंढ रहे थे, फिर उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर प्रिंटिंग शुरू करी.

डॉ. विकास दिव्‍यकीर्ति के एजुकेशन से जुडी की जानकारी
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति बहुत पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं, उन्होंने बीए (इतिहास), एमए हिंदी, एमए सोशियोलॉजी, मास कम्युनिकेशन, एलएलबी, मैनेजमेंट आदि की पढ़ाई की हुई है. उन्होंने जेआरएफ क्लियर और हिंदी में पीएचडी की है.

उन्होंने यूपीएससी को क्रैक करा और गृह मंत्रालय में नौकरी करी. फिर कुछ समय बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और डीयू के कॉलेज में शिक्षक के रूप में काम करने लगे. फिर उन्होंने आईएएस कोचिंग संस्‍थान दृष्टि को स्थापित करा.

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