कभी सिर्फ 45 रुपये की सैलरी पर करते थे नौकरी, आज है 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार

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शिक्षक शब्द जब भी सामने आता है तो फिर अनुशासन, शालीनता, स्कूल, छात्र, किताब, और सरलता, कुछ ऐसी ही तस्वीरें हमारी आंखों के सामने आ जाती हैं. मगर जब लक्ष्मणराव काशीनाथ किर्लोस्कर की बात आती है तो फिर इन सब से एक और बड़ा किस्सा जुड़ा होता है. विद्यालय में सृजन और प्रतिभा निर्माण का कार्य करने वाले शिक्षक वास्तविक जीवन में भी निर्माण और सृजन का महान काम कर सकता है.

आज हम बात करने जा रहे है लक्ष्मणराव काशीनाथ के बारे में जिन्होंने किर्लोस्कर समूह की स्थापना कर समाज को नई दिशा दी है. उनकी कहानी से यह भी पता चलता है कि सफलता के लिए सोच और हिम्मत का बड़ा होना काफी जरूरी है. इसके लिए पैसा और पारिवारिक परिस्थितियां मायने नहीं रखतीं.

कभी सिर्फ 45 रुपये के वेतन पर काम करने वाले शिक्षक ने 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा कर दिया है. ऐसा कर दिखाया है लक्ष्मणराव काशीनाथ किर्लोस्कर ने. एक बार किर्लोस्कर ने कहा था कि आगे बढ़ने के लिए सोच बड़ी होनी चाहिए, जेब से नहीं.

शुरुआत से नहीं लगता था पढ़ने में मन

लक्ष्मणराव किर्लोस्कर का जन्म 20 जून 1869 को महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव गुरलौहसुर में हुआ था. किर्लोस्कर का बचपन से ही पढ़ने में मन बिलकुल भी नहीं लगता था. उन्होंने मुंबई के जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में मैकेनिकल ड्राइंग सीखी. फिर वे विक्टोरिया जुबली टेक्निकल इंस्टीट्यूट, मुंबई में शिक्षक बने.

साल 1888 में उन्होंने अपने भाई रामुआन्ना के साथ मिलकर ‘किर्लोस्कर ब्रदर्स’ नाम से एक साइकिल की दुकान खोली. जल्दी ही उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी. फिर उन्होंने चारा काटने की मशीन और लोहे का हल बनाने वाली एक छोटी सी फैक्ट्री की शुरुआत भी करी. बहुत मुश्किलों के बाद उन्होंने औंध के राजा से उधार लेकर 32 एकड़ बंजर जमीन खरीदी.

पहला लोहे का हल बेचने में लग गए थे 2 साल

वहां पर फैक्ट्री खोलने से जमीन की सूरत पूरी तरह से ही बदल गई. किर्लोस्कर को अपना पहला लोहे का हल बेचने में दो साल लग गए थे. मगर लक्ष्मणराव किर्लोस्कर ने हार बिलकुल भी नहीं मानी. किर्लोस्कर ने आज जो कंपनी बनाई है, वे 2.5 अरब डॉलर से अधिक का विशाल समूह बन चुकी है.

आज कंपनी की कुल आय 2.5 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा

साल 1888 में शुरू हुए किर्लोस्कर ग्रुप का नाम तब किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड रखा गया था. लक्ष्मणराव किर्लोस्कर के नेतृत्व में इस कंपनी को ऐतिहासिक सफलता मिली. आज किर्लोस्कर समूह वाल्व, पंप, इंजन, और कंप्रेसर के इंजीनियरिंग और निर्माण में लगा हुआ है. आज के समय में कंपनी में लगभग 28,000 कर्मचारी कार्यरत हैं. कंपनी की कुल आय 2.50 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा है.

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