कभी स्‍कूल ने मना कर दिया था एडमिशन, माँ बेचती थी सब्जिया; आज बेटी बनी बड़ी कंपनी की बॉस

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मधु प्रिया चेन्नई की वह युवा लड़की है जिसने दुनिया को दिखाया है कि किसी की सफलता का अंदाजा उसके पास उपलब्ध संसाधनों से नहीं आंका जाना चाहिए. इस युवती के माता-पिता सब्जी विक्रेता का काम करते हैं मगर मधु प्रिया ने इस बात की परवाह बिलकुल भी नहीं करी और आज वे एक एच आर प्रोफेशनल बन चुकी हैं.

चेन्‍नई के सबसे बेस्‍ट स्‍कूल में करी पढ़ाई
जब मधु प्रिया छोटी थीं, तब ही उन्हें पता चल गया था कि वह किस वर्ग की हैं. लेकिन उनके माता-पिता ने बेटी को चेन्‍नई के सबसे अच्छे स्कूल में पढ़ाया.
उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि वह चेन्नई या फिर अपने राज्य में कहीं भी घूमने के लिए नहीं जा सकती थी. जब बाकी बच्चे स्कूल की छुट्टियों में घूम रहे थे तो मधु अपने माता-पिता की मदद कर रही थी.

मां ने करे कई बलिदान
मधु की मां का सपना था कि मधु एक ऐसे कॉन्वेंट स्कूल में अपनी पढ़ाई करे जो शहर में सबसे अच्छा हो. लेकिन वहां पहुंचना आसान बिलकुल भी नहीं था. मधु की मां को बहुत बार स्‍कूल से वापिस भेज दिया जाता था. लेकिन उनकी मां ने हार नहीं मानी और हर रोज स्कूल ऑफिस में चली जाती थी. मां की जिद देखकर स्कूल को भी झुकना पड़ा और मधु को दाखिला मिल गया.

स्‍कूल ने कर दिया था मना एडमिशन से
मधु ने बताया कि उस स्कूल में केवल राजनेताओं, अभिनेताओं, और खिलाड़ियों के बच्चे पढ़ाई करते होते थे. इस कारण से ही उन्हें एडमिशन देने से वंचित कर दिया जाता था अपनी मां के कारण ही दोनों बेटियां इस स्कूल में पढ़ सकीं. अपनी बेटियों की पढ़ाई पर ही मां ने सारा पैसा खर्च कर दिया था. और मधु कि माँ ने भविष्‍य के लिए कोई भी पूंजी बिलकुल नहीं बचाई.

सुबह 4 बजे से रात के 11 बजे तक काम करती थी मां
मधु कि मां सुबह 4 बजे दुकान को खोलती और रात को 11 बजे दुकान बंद कर देती. वे पूरे दिन में दुकान से सिर्फ 800 रुपये ही कमा पातीं थी. इसी आय से ही मधु कि मां ने अपनी दो बेटियों को पढ़ाया. स्कूल में जब भी चंदा मांगा जाता था, उनकी मां ने हर बार कुछ न कुछ योगदान दिया ताकि उनकी बेटियों को शर्मिंदा न होना पड़े.

मधु ने एक बार बताया था कि अपनी बेटियों को शर्मिंदगी से बचाने का यह उनकी मां का तरीका था. माँ सोचती थी कि जिस बैकग्राउंड से बेटियाँ आती हैं, उस कारण से लोग उसका मज़ाक उड़ा सकते हैं. अब मां देवकी को गर्व होता है जब उनकी बेटी अंग्रेजी में बात करती है. मधु एक ढाई साल की बच्ची की मां भी हैं और वह भी अपनी मां को अंग्रेजी में बात करते देख खुश होती है. मधु की कड़ी मेहनत रंग लाई है.

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