कभी 100 रुपये की फ़ीस लेकर शुरू किया था बिजनेस, आज सालाना करते है 7 करोड़ रुपये का बिजनेस

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भारत में गृहिणी को सिर्फ घर के कामों तक ही सीमित रखा गया है. महिलाओं से व्यापार या नौकरी की बहुत कम उम्मीद रखी जाती है. हालाँकि, इन सभी धारणाओं को समय के साथ महिलाओं द्वारा गलत साबित किया गया है, चाहे वह कोई भी क्षेत्र हो ग्रहणी महिलाएं घर और बाहरी दुनिया दोनों को अच्छी तरह से चला सकती हैं.

कभी हाउसवाइफ रह चुकी शेफ नीता शर्मा भी उन्हीं महिलाओं में से एक हैं. आज हम बात करने जा रहे हैं नीता शर्मा की प्रेरक कहानी के बारे में, जो हर ग्रहणी को प्रेरित करेगी. आइए जानते हैं नीता मेहता के बारे में

कौन हैं शेफ नीता मेहता

नीता मेहता कुकिंग की दुनिया का जाना-माना चेहरा हैं. शेफ होने के साथ-साथ वह एक स्तंभकार, लेखिका, साहित्यकार भी हैं. नीता मेहता ने कुकिंग से जुड़े कई शो भी होस्ट किए हैं और कई मशहूर कुकिंग बुक्स भी लिखी हैं. कभी हाउसवाइफ रहीं नीता आज नामी बिजनेस फर्मों की मालकिन हैं.

इस तरह से करी थी शुरुआत

एक सफल गृहिणी से एक बड़े व्यवसाय की मालकिन बन जाने तक का सफर नीता के लिए इतना आसान नहीं था. बात साल 1982 की है नीता के पति का दवाइयों का कारोबार था, लेकिन उस बिज़नेस से कोई कमाई नहीं हो पा रही थी. ऐसे में नीता ने अपने पति की मदद करने का फैसला किया. जिसके लिए उन्होंने कुकिंग क्लास शुरू की एक समय था जब नीता छात्रों को महज 100 रुपये की फीस पर खाना बनाना सिखाती थीं.

शेफ नीता मेहता बनी मशहूर हस्ती

धीरे-धीरे शेफ नीता की क्लासेस और भी लोकप्रिय होती गईं. इससे उत्साहित होकर नीता के दोस्तों ने उन्हें अपनी पुस्तक प्रकाशित कराने के लिए प्रोत्साहित किया. फिर नीता ने साल 1992 में अपनी पहली किताब ‘वेजिटेरियन वंडर्स’ लिखी. नीता की यह किताब काफी लोगो को पसंद आई

उस वर्ष नीता की लगभग 3,000 प्रतियां बिकीं, जिससे वह और भी मशहूर हो गईं. पुस्तक की सफलता के बाद, नीता ने अन्य पुस्तकों को प्रकाशित करने के बारे में सोचा, अब तक उनकी 400 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनकी एक किताब ‘फ्लेवर्स ऑफ इंडियन कुकिंग’ को पेरिस वर्ल्ड कुक बुक फेयर अवॉर्ड से नवाजा गया था.

मेहनत के बाद बनीं मल्टी बिजनेस वुमन

जब शेफ नीता की किताबें मशहूर होने लगीं, फिर उन्होंने अपना प्रकाशन खोला. जिसके साथ वह 1994 में स्नैब पब्लिशर्स की मालकिन बनीं, उन्होंने बच्चों से जुड़ी कई किताबें भी प्रकाशित कीं 4 लाख से शुरू हुआ स्नब प्रकाशन, लेकिन आज यह फर्म करोड़ों रुपये कमाती है. प्रकाशन के बाद उन्होंने मसाला कारोबार में हाथ आजमाया जहां पर उन्हें काफी सफलता मिली.

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