कभी 12 साल की उम्र में मजदूरी कर चलाना पड़ता था घर; आज सालाना करते है 100 करोड़ रुपये का बिजनेस

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आज हम एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बात करने जा रहे हैं. जिसने अपनी जिंदगी का वो दौर देखा है जिसकी शायद कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है. बचपन में घर में गरीबी और आर्थिक तंगी का माहौल इतना था कि उन्हें मजदूरी भी करनी पड़ती थी.

लेकिन उस व्यक्ति ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से अपनी किस्मत खुद बदल ली. आज वह करोड़पति ही नहीं बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी हैं. हम बात कर रहे हैं राजस्थान के भंवरलाल आर्य की.

12 साल की उम्र में करी थी मज़दूरी

भंवरलाल आर्य का जन्म 1 जून 1969 को राजस्थान के कल्याणपुर तहसील के बगनी की ढाणी में हुआ था. उनके पिता का नाम राणाराम मुंडन और माता का नाम राजोदेवी है. उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी.

इस दौरान उन्हें पेट भरने के लिए भी मज़दूरी तक करनी पड़ी. 12 साल की उम्र में भंवरलाल के लिए मजदूर का काम करना बहुत मुश्किल था. लेकिन, परिवार की आर्थिक स्थिति के आगे वह बेबस था.

कर्नाटक के एक सेठ ने उन्हें अपनी दुकान में रख लिया था. शुरुआत में उसका मालिक उसे खाना, कपड़े और रहने के लिए जगह देता होता था. फिर बाद में वह उन्हें 50 रुपये वेतन भी देने लगा. यही वह दुकान थी जिसने भंवरलाल की जिंदगी बदल दी.

30 हजार रुपए से शुरू किया कपड़े का कारोबार

दरअसल, इस दुकान पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग आया करते थे. उनके कहने पर भंवरलाल ने संघ की शाखाओं में जाने लगे. बाद में उन्हें संघ की शाखाओं से इतना लगाव हो गया कि उन्होंने इसके लिए अपनी नौकरी छोड़ दी.

मालिक उसे 22 दिन के शिविर में जाने की छुट्टी नहीं दे रहा था. संघ के शिविर में क्रांतिकारियों के जीवन की घटनाओं ने उन्हें प्रभावित करा हुआ था. काफी सालों के संघर्ष के बाद उन्होंने फैसला करा कि वह अब अपना खुद का कोई काम करेंगे. इसी सोच के साथ उन्होंने करीब 30 हजार रुपए लगाकर कपड़े का कारोबार शुरू कर दिया.

सिर्फ एक साल के भीतर ही भंवरलाल को एक लाख रुपये तक का मुनाफा हो गया. फिर 1990 में उन्होंने एक दुकान खरीद ली और अपने छोटे भाई के साथ मिलकर ‘जनता टेक्सटाइल’ की नींव रखी. फिर वह दिन आया, जिसका दशकों से भंवरलाल इंतजार कर रहे थे. अब वह इलाके में मशहूर हो चुका था. इतना प्रसिद्ध होने के कारण उन्हें अपने क्षेत्र के व्यापारी संघ का अध्यक्ष चुना गया.

‘जनता टेक्सटाइल’ का टर्नओवर 100 करोड़ से ज्यादा

उनका “जनता टेक्सटाइल” बढ़ रहा है और वह देश के करोड़पतियों में से एक हैं. उनके जनता टेक्सटाइल्स का सालाना टर्नओवर 100 करोड़ से ज्यादा हो गया है. अपने सामाजिक कार्यों के लिए भंवरलाल को कर्नाटक राज्य उत्सव, संस्कार भारती से योग रत्न, जैसे कई पुरस्कारों से भी सम्मानित करा जा चुका है.

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