कॉलेज छोड़कर किया वेटर का काम, पापा से लिए 8 हजार उधार; आज सालाना करते है 4 करोड़ रुपये का बिजनेस

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अगर आप जीवन में कुछ अलग करने की ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं है. एमपी के एक गांव के प्रफुल्ल ने इस बात को सच साबित कर दिया है. प्रफुल्ल चाय बेचने के धंधे में है और आज वह इतना सफल हो गया है कि उसके कारोबार का कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच गया है.

अहमदाबाद के रहने वाले 25 साल के प्रफुल्ल बिलोर को देशभर में ‘एमबीए चायवाला’ के नाम से जाना जाता है. अन्य छात्रों की तरह प्रफुल्ल भी एमबीए में अपना करियर बनाना चाहता था. लेकिन एमबीए में फेल होने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा है. इसके बाद प्रफुल्ल बिलोर ने एमबीए करना छोड़ दिया और सड़क किनारे चाय के स्टॉल लगाने लगे. उसके बाद प्रफुल्ल ने जो किया वह हम सबके लिए प्रेरणादायी कहानी बन गया.

प्रफुल्ल ने ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष किया. उन्होंने कहा, ‘मेरी तमाम कोशिशों के बावजूद कैट में अच्छे अंक नहीं आने पर मैं निराश हो गया था. इसलिए मैंने यात्रा करने का फैसला किया. लेकिन मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं सिर्फ स्नातक करूं. लेकिन मैंने बहुत यात्रा की, लेकिन जब मैं अहमदाबाद पहुंचा तो मैंने रुकने का फैसला किया. यहां मुझे एक रेस्टोरेंट में पार्ट टाइम जॉब मिल गई.”

प्रफुल ने कहा, “मैं जानता हूं कि मेरे माता-पिता नहीं समझेंगे, क्योंकि वे डिग्री हासिल करना चाहते थे.” इसलिए मैंने एमबीए कॉलेज में प्रवेश लिया. अब मैं पढ़ रहा था और काम कर रहा था. लेकिन सच कहूं तो मैं एमबीए के छात्र से ज्यादा कैशियर के तौर पर सीख रहा था. मैं अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहता था, लेकिन मेरे पास अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए पर्याप्त धन नहीं था. फिर, एक दिन मैंने एक चाय पीने वाले से बात की. फिर मैंने चाय की दुकान खोलने का फैसला किया.

चाय की दुकान खोलने के पहले दिन प्रफुल्ल द्वारा बेचा गया दूध खराब हो गया था. प्रफुल्ल चाय बनाता था, लेकिन इस दौरान चाय बहुत मीठी हो गई. इन मुसीबतों में प्रफुल्ल ने पहले दिन सिर्फ 1 कप चाय बेची. लेकिन दूसरा दिन अच्छा गुजरा और चाय पार्टी ने राजनीति की खूब बातें कीं. आखिरकार प्रफुल्ल की चाय की टोकरी अच्छा करने लगी.

प्रफुल्ल का काम अच्छा चल रहा था. नतीजतन, वह 15,000 रुपये प्रति माह कमाने लगा. लेकिन प्रफुल इस नौकरी में सब कुछ देना चाहता था, इसलिए उसने एमबीए की पढ़ाई छोड़ दी. इस बार, हालांकि, उसके माता-पिता ने कहा कि वह अपने परिवार को शर्मिंदा करने पर आमादा था. उसके दोस्तों ने भी उसे बताया कि वह एमबीए करने गया था और क्या करना है. लेकिन प्रफुल्ल ने सभी को इग्नोर करना ही बेहतर समझा.

आखिर वह दिन आ ही गया जब प्रफुल्ल की टपरी को एमबीए चायवाला के रूप में पहचान मिली! नतीजतन, प्रफुल्ल को शादियों में चाय के ऑर्डर मिलने लगे. फिर जब प्रफुल्ल ने 2 साल बाद अपना पहला कैफे खोला तो उसके माता-पिता को उस पर बहुत गर्व हुआ. प्रफुल्ल के पास अब पूरे भारत में फ्रेंचाइजी हैं और वह आईआईएम जैसे बड़े संगठनों को आमंत्रित कर रहा है.

प्रफुल्ल की सफलता को उन लोगों ने खूब सराहा जो उनका उपहास करना चाहते थे, प्रफुल्ल ने कहा कि अब लोग मुझसे सलाह मांगते हैं. मैं उनसे कहता हूं, डिग्री मायने नहीं रखती. मैं वहां वही करता हूं जो मुझे पसंद है. प्रफुल्ल ने एमबीए छोड़ दिया और एक चाय की दुकान ले ली. अपना चाय व्यवसाय शुरू करने के बाद से 4 वर्षों में, उन्होंने 3 करोड़ रुपये कमाए हैं और देश भर में ख्याति प्राप्त की है.

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