पहली कमाई थी 300 रुपये और आज है करोड़ों के मालिक, अमिताभ बच्चन का जीरो से हीरो तक का सफर

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ये कहानी हैं एक ऐसे व्यक्ति की जिसने की अपनी जिंदगी में बड़े से बड़ा रिजेक्शन सहा है मगर फिर भी हार न मानकर अपनी लगन और मेहनत के दम पर आज वो बन गए है इस सदी का महानायक अब तो आप लोग आप महानायक के शब्द से समझ ही चुके होंगे की हम आखिर किसकी बात कर रहे हैं क्युकी वो कोई भी ऐसा-वैसा शख्स नहीं हैं.

वो एक ऐसे व्यक्ति हैं जिसने अपनी पूरी ज़िन्दगी में बहुत कुछ देखा भी हैं और सभी लोगो को दिखाया भी हैं अपने अभिनय से और ऐसे कलाकार बहुत ही कम होते हैं जो अपनी नजरो से ही ऐसा खेल दिखाते होते हैं की पूरी दुनिया ही उनकी दीवानी हो जाती हैं, आज का बच्चा बच्चा अमिताभ बच्चन के जैसा ही बनना चाहता हैं और बनना भी चाहेगा ही क्योकि वे शक्सियत ही कुछ ऐसी हैं. हम आप लोगो को आज अमिताभ बच्चन की ज़िन्दगी के कुछ पहलुओ से रूबरू कराने वाले हैं.

इस बात को तो हर कोई ही जानता हैं की ‘सात हिन्दुस्तानी’ नाम की फिल्म से अमिताभ बच्चन ने अपनी एक्टिंग कैरियर की शुरुवात करी थी और अपना पहला डेब्यू दिया. जिसमे की वो सात लीड एक्टरो में से एक रहे थे मगर इस बात को कम लोग ही जानते हैं की आल इंडिया रेडियो से इस अभिनेता को उनकी अयोग्य आवाज़ के कारण रिजेक्ट कर दिया गया था. मगर फिर भी फिल्म इंडस्ट्री में अमिताभ की पहली कमाई एक वौइस् ओवर के जरिये ही हुई थी. ‘भुवन शौन’ नाम की मिर्नाल सेन की फिल्म में अमिताभ बच्चन ने वौइस् ओवर करके पहली बार इंडस्ट्री से करीब 300 रूपये की कमाई करी थे.

मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन का मख्तसी का दौर कुछ ऐसा था की जिस समय वो कलकत्ता से नौकरी को छोड़कर बम्बई में आये तो फिर मरीन ड्राइव की बेंच पर बहुत सी राते उन्होंने काटी. क्योकि अमिताभ को पता तो था की उन्हें आखिर क्या काम करना हैं मगर इस फिल्म की इंडस्ट्री में अपनी जगह बना पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल था और वो भी उस समय जब वहां पर उनका कोई कनेक्शन नहीं था.

हर किसी व्यक्ति की ज़िन्दगी में एक ना एक बार तो सफलता के शुरुवाती दौर में भगवान् परीक्षा जरूर लेते ही हैं यदि आप इस परीक्षा में हार नहीं मानकर खरे उतर गए तो फिर आपको सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता और यदि नहीं तो फिर आप वही कही कुवे के मेंडक बन कर रह जाते हैं.

जिनमे हिम्मत होती हैं सिर्फ वही लोग ही कुछ बन पाते हैं जिन में से एक नाम अमिताभ बच्चन का भी हैं. हाँ तो फिर मरीन ड्राइव में अमिताभ बच्चन ने कुछ समय तक राते गुजारी क्योकि अमिताभ के पास कुछ काम नहीं था, फिल्मो में नहीं होने के कारण कोई अमिताभ को जानता भी नहीं था और वो कुछ निराशा की ओर बढ़ते ही जा रहे थे यहाँ तक की अंत में वो एक फिल्म में एक एक्स्ट्रा के रूप में भी काम कर लेने को पूरी तरह से तैयार हो गए थे मगर तभी उस दौर के एक मशहूर अभिनेता शशी कपूर ने अमिताभ बच्चन को कहा कि वे इस तरह के कामो के लिए बिलकुल भी नहीं बने है.

मगर तब तक अभिनेता अमिताभ बच्चन को तब तक काम मिल चूका था मगर उस समय अभिनेता अमिताभ की एक के बाद एक फिल्म फ्लॉप होती जा रही थी और तभी अमिताभ के गॉड फादर ऋषिकेश मुखेर्जी ने उन्हें ‘आनंद’ नाम की फिल्म के लिए साइन कर लिया और उस समय भला यह कौन जनता था कि आनंद फिल्म का ‘बाबु बोशाई’ एक दिन बन जाएगा ‘बिग बी.’ ये बात तो बिलकुल ही सही हैं की अभिनेता अमिताभ बच्चन की फिल्म ज़ंजीर बॉक्स ऑफिस पर बहुत ज्यादा धमाल कर गई थी ‘नमक हराम’ ऋषिकेश मुखेर्जी की फिल्म से अमिताभ की ‘एंग्री यंग मैन’ की इमेज बन चुकी थी.

इसके साथ ही 70 का दशक भी बड़ा ही जज्बाती था जहाँ पर रोमांस तो पूरी तरह से ही फेड आउट हो रहा था और एंग्री यंग मन इस फिल्म की दुनिया में आगे बढ़ ही रहा था इसकी असल वजह यही थी की बहुत से दर्शक उन फिल्मो को काफी ज्यादा पसंद करते हैं जो की उन्हें खुद को फिल्म से जोडती होती है. उस समय में भारत में एक तरफ काफी गरीबी थी, लोगो में गुस्सा था और उस गुस्से को ट्रांसफॉर्म करा अमिताभ बच्चन की पर्सनालिटी के द्वारा उनकी फिल्म्स में जिसमे उनका बहुत ही धमाकेदार एक्शन होता था.

अभिनेता अमिताभ बच्चन की जोड़ी एक से बड कर एक डायरेक्टर, प्रोडूयुसर के साथ बनी थी चाहे वो यश चोपड़ा हो, रमेश सिप्पी, प्रकाश मेहरा, या फिर मसाला फिल्मो का जाना माना नाम मनमोहन देसाई इन सभी के साथ अभिनेता अमिताभ बच्चन की जोड़ी ऐसे बनी की बस बॉक्स ऑफिस पर इनका ही राज होने लगा और आज के समय में हर कोई अमिताभ बच्चन को जनता है. शायद अमिताभ के लिए ये कहावत बिलकुल ही सटीक बैठती हैं की जिसने इस दुनिया का दिल जीत लिया उसने सब कुछ जीत लिया.

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