पिता करते थे बैंक में साधारण नौकरी, बिटिया ने बहुत मेहनत की; आज है 3500 करोड़ रुपये की मालकिन

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भारतीय मूल की अमेरिकी इंद्रा नूई कोई अजनबी महिला बिलकुल भी नहीं हैं. जब भी शक्तिशाली और सफल महिलाओं की बात होती है तो फिर इंद्रा नूई का नाम भी सामने जरूर आता है. इंद्रा नूई पेप्सिको की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रही हुई हैं. इंद्रा नूई को यह सफलता यूं ही नहीं मिली. इस सफलता के पीछे इंद्रा नूई की कड़ी मेहनत और समर्पण है.

इंद्रा नूई की जीवनी

1955 में भारत के तमिलनाडु राज्य में इंद्रा नूई का जन्म हुआ था. उनके पिता ‘स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद’ में नौकरी करते होते थे. इंद्रा नूई ने अपनी स्कूली शिक्षा अपने जन्म स्थान से ही करी हुई है. इसके बाद उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा की पढ़ाई की. इंद्रा नूई ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कलकत्ता से बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है.

ऐसे हुई थी ​करियर की शुरुआत

नूई ने समर इंटर्नशिप के हिस्से के रूप में बॉम्बे में परमाणु ऊर्जा विभाग में काम करा था. स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद उन्होंने जॉनसन एंड जॉनसन के साथ अपना करियर की शुरुआत करी थी और कंपनी को प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान करी.

उन्होंने बूज एलेन हैमिलटन में इंटर्नशिप भी की. 1980 में येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से स्नातक करने के बाद, वह बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप में शामिल हो गईं थी, जहां उन्होंने 6 साल तक सलाहकार के तौर पर काम करा था. इसके बाद उन्होंने मोटोरोला, इंक. और इंजीनियरिंग कंपनी आसिया ब्राउन बोवेरी में कार्यकारी का पद संभाला.

​साल 1994 में शामिल हुई पेप्सिको में

नूई 1994 में कॉर्पोरेट रणनीति और विकास के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में पेप्सिको में शामिल हुईं. जब वह पेप्सिको में शामिल हुईं, तो अमेरिका की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में से किसी कंपनी में भी महिला सीईओ नहीं थी. 2001 में नूई को कंपनी का सीएफओ बनाया गया था और करीब पांच साल बाद यानी 2006 में नूई कंपनी की चेयरमैन और सीईओ बनीं. साल 2006 में अमेरिका में 11 महिला सीईओ थीं. इंद्रा नूई पेप्सिको की 5वीं और पहली महिला सीईओ बनी थीं.

आज होती है ​बेहतरीन सीईओ में गिनती

इंद्रा नई की गिनती दुनिया के बेहतरीन सीईओ में होती है. उनके नेतृत्व में, पेप्सिको का राजस्व 2006 में 35 अरब डॉलर से बढ़कर 2017 में 63.5 अरब डॉलर हो चूका था. पेप्सिको को आगे ले जाने के लिए उनकी सभी रणनीतियाँ सफल रहीं थी.

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