बस कंडक्टर की बेटी ने सेल्फ स्टडी कर पास की UPSC परीक्षा, 285वि रैंक हासिल कर बनीं IPS अधिकारी

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देश में एक समय था जब लड़कियों को अभिशाप माना जाता था लेकिन धीरे-धीरे यह धारणा बदल गई और आज लड़कियां कदमों पर चल रही हैं. पहले लड़कियों की शिक्षा पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था. 1990 में महिला साक्षरता दर केवल 40 प्रतिशत थी. यानी आज यह 60 फीसदी से ज्यादा है. अगर महिलाओं को मौका दिया जाए तो वे भी पुरुषों की तरह ही सफल हो सकती हैं. आज हम जिस आईपीएस ऑफिसर के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वो भी एक महिला हैं. इस महिला IPS का नाम शालिनी अग्निहोत्री है.

एक गरीब परिवार से शालिनी के पिता बस कंडक्टर हैं. उन्होंने शालिनी को लड़के और लड़की के बीच भेद किए बिना पढ़ाया. तब से, शालिनी एक आईपीएस अधिकारी बन गई है और अपने और अपने परिवार के लिए नाम कमा रही है. आइए जानें कि कैसे शालिनी वित्तीय कठिनाइयों और बुनियादी जरूरतों का सामना करते हुए यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास करने में सफल रही.

शालिनी हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता बस कंडक्टर हैं. उन्हें मिलने वाला वेतन उनके परिवार का समर्थन करने के लिए पर्याप्त था. शालिनी को पढ़ाई में परिवार का पूरा सहयोग मिला. इस वजह से वह कम उम्र से ही पढ़ाई में बहुत अच्छी थी. उन्होंने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई धर्मशाला के डीएवी स्कूल से की. उन्होंने बुनियादी शिक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए. शालिनी बचपन से ही आईपीएस ऑफिसर बनना चाहती थी.

अपनी बुनियादी शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय से स्नातक करना शुरू किया. इसी दौरान उन्हें पता चला कि यूपीएससी की परीक्षा पास कर कोई व्यक्ति आईपीएस अधिकारी बन सकता है. यहीं से उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की. शालिनी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब वह यूपीएससी की तैयारी कर रही थीं. फिर उसने अपने माता-पिता से कुछ नहीं कहा. लेकिन परीक्षा पास करने के बाद उसने अपने माता-पिता को इसकी जानकारी दी.

शालिनी अग्निहोत्री जब बहुत छोटी थीं, तब वह अपनी मां के साथ कहीं बस में यात्रा कर रही थीं. तभी उनकी सीट के पीछे बैठा एक शख्स नशे में धुत था. वह शालिनी और उसकी माँ की सीट पर हाथ रख रहा था. इस पर उसकी मां ने उसे हाथ हटाने को कहा और मारपीट की. वह आदमी केवल शालिनी की मां से नाराज था. उन्होंने शालिनी की मां से कहा कि आप कमिश्नर हैं, जिन्हें आपकी बात माननी चाहिए. शालिनी उस समय बहुत छोटी थी लेकिन वह जानती थी कि कमिश्नर बहुत बड़ा अधिकारी होगा. वह उस दिन से अफसर बनने की सोच रहा था.

शालिनी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके माता-पिता ने उन्हें लड़का बनना सिखाया था. वह न केवल शालिनी पर विश्वास करता था बल्कि उसे पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित भी करता था. उन्होंने 2011 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा पास की और वे इस परीक्षा में सफल हुए. उसके बाद 2012 में इंटरव्यू देकर उन्होंने क्वालिटी में अच्छा रैंक हासिल किया. शालिनी पूरे भारत में 285वें स्थान पर थी. जब उसने परिवार को खुशखबरी सुनाई तो उसे विश्वास नहीं हुआ.

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