महिला होने के कारण नहीं दी थी नौकरी, शुरू किया बिजनेस; आज खड़ी कि 18 हजार करोड़ रुपये की कंपनी

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बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ को ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने सर्वोच्च नागरिकता अवॉर्ड से सम्मानित करा है. भारत में ऑस्ट्रेलिया उच्चायुक्त ने इस बार में जानकारी दी है. उन्होंने यह कहा कि बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ ने ऑस्ट्रेलिया और भारत के संबंध को पहले से भी ज्यादा अच्छा करने में बहुत ही अहम भूमिका निभाने का काम करा है.

किरण मजूमदार शॉ ने अपनी पढ़ाई फेडरेशन यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया से पूरी करी थी. किरान मजूमदार शॉ ने महज 1200 रुपये से इस बिजनेस की शुरुआत करी थी और आज उनका बिजनेस 35 हजार करोड़ से ज्यादा का है. आइए जानें किरण मजूमदार शॉ की कहानी के बारे में.

1200 रुपये से शुरू करा था यह कारोबार

फोर्ब्स मैगजीन ने बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ का नाम पूरी दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में शामिल करा हुआ है. मगर एक व​क्त इस तरह का भी था जब किरण मजूमदार शॉ को कुछ कंपनियों ने नौकरी देने से भी साफ मान कर दिया था.

किरण मजूमदार शॉ के महिला होने के कारण से कुछ कंपनियों की बर्ताव के बाद किरण मजूमदार शॉ ने सिर्फ 1200 रुपये लगातार खुद का कारोबार शुरू कर दिया था, जो वर्तमान में लगभग 18 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की कंपनी बन गई है.

पहली नौकरी मिली थी स्कॉटलैंड में

किरण मजूमदार शॉ का जन्म बैंगलोर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. साल 1978 में जब किरण मजूमदार शॉ ऑस्ट्रेलिया देश से शराब बनाने की प्रक्रिया में मास्टर्स की डिग्री लेकर भारत देश में वापिस आई तो फिर भारत के कुछ बीयर उत्पादकों ने किरण के महिला होने के कारण नौकरी देने से बिलकुल ही मान कर दिया था.

इस समय किरण मजूमदार शॉ सिर्फ 25 साल की उम्र की थी. भारत देश में किरण को नौकरी नहीं मिल रही थी और इसी वजह से किरण स्कॉटलैंड में चली गईं थी. वहां पर किरण मजूमदार शॉ ने ब्रूवर की नौकरी करी. यहीं पर ही किरण मजूमदार शॉ की किस्मत बद गई और बायोकॉन की स्थापना की राह भी खुली.

इस तरह से शुरू हुई बायोकॉन कंपनी

किरण मजूमदार शॉ की मुलाकात स्कॉटलैंड में ही काम करते हुए आइरिश उद्यमी लेस्ली औचिनक्लॉस से हुई. उसी दौरान आइरिश उद्यमी लेस्ली औचिनक्लॉस भारत देश में फार्मा सेक्टर में बिज़नेस शुरू करना चाहते थे.

किरण मजूमदार शॉ के काम से काफी ज्यादा प्रभावित होने के कारण उन्होंने किरण मजूमदार शॉ को भारत में कारोबार को संभालने का प्रस्ताव दे दिया. हालांकि, किसी भी तरह का कोई अनुभव बिलकुल भी नहीं होने की वजह से शुरुआत में किरण मजूमदार शॉ ने थोड़ी हिचक दिखाई. मगर इसके बावजूद लेस्ली नहीं मानीं और फिर उन्होंने किरण मजूमदार शॉ को उनके इस कारोबार संभालने के लिए मना ही लिया. और इस तरह से बायोकॉन साल 1978 में अस्तित्व में आई.

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