मोदी जी ने नोटबंदी करी तो दिमाग में आया भयंकर आइडिया, आज खड़ी की 700 करोड़ रुपये की कंपनी

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मोबाइल वॉलेट और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों शुरू हो जाने से नकदी ले जाना बिलकुल ही अव्यावहारिक हो चूका है. बिजली बिल, फोन रिचार्ज, किराने का सामान, और अन्य लेनदेन, सभी मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके करे जाते हैं.

फोनपे भी बिलकुल इसी तरह की सेवाएं प्रदान करता है पर फोनपे ने लाखों भारतीयों के जीवन को बहुत ही आसान बना दिया है. आज हम बात करेंगे फोनपे के फाउंडर समीर निगम की, अपने इस अलग आइडिया से समीर ने बाजार को पूरी तरह से ही बदल कर रख दिया है.

कौन हैं समीर निगम
साल 2015 में समीर निगम ने फोनपे की स्थापना करी थी और वर्तमान में समीर निगम इसके सीईओ के रूप में कार्य कर रहे है. समीर निगम ने फ्लिपकार्ट में इंजीनियरिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में भी काम करा हुआ है. समीर निगम ने साल 2009 में अपनी पहली कंपनी Mime360 से शुरुआत करी थी. यह कंपनी सामग्री मालिकों को सामग्री प्रदाताओं से जोड़ती होती थी.

ऐसे रही थी समीर की व्यावसायिक यात्रा
समीर सबसे पहले Shopzilla में खोज उत्पाद विकास निदेशक रहे थे. Mime360 ऑनलाइन सोशल मीडिया वितरण मंच कंपनी थी, इस कंपनी को समीर ने साल 2009 में स्थापित करा था और यह कंपनी फ्लिपकार्ट द्वारा खरीदी जा चुकी थी. साल 2015 में, समीर ने अपना खुद का डिजिटल वॉलेट प्लेटफॉर्म फोनपे की भी शुरुआत करी, जहां वह अभी सीईओ के रूप में कार्यरत हैं.

PhonePe के संस्थापक
समीर ने दिसंबर 2015 में एक एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस आधारित व्यवसाय फोनपे की स्थापना करी थी. वे अभी इस कंपनी के निदेशक मंडल में कार्य कर रहे है और विपणन और अन्य रणनीतिक सलाह प्रदान करते होते है.

उन्होंने अपने दो दोस्तों राहुल चारी और बुर्जिन इंजीनियर की मदद से यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस पर आधारित एक ऑनलाइन भुगतान सॉफ्टवेयर बनाने की अवधारणा पेश करी थी. अगस्त 2016 में, यह कंपनी आवेदन ऑनलाइन हो गई थी. यह वर्तमान में 11 से भी ज्यादा भारतीय भाषाओं में उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है.

समीर निगम की नेट वर्थ
समीर निगम की कुल संपत्ति 17.7 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है नवंबर 2016 में देश में नोटबंदी होने फोनपे के लिए बहुत फायदेमंद रहा था. उस समय यूजर्स के पास यूपीआई जैसा विकल्प बहुत ही कम था और लोगों ने दिन भर एटीएम और बैंकों में लंबी लाइन लगाने से बेहतर यूपीआई जैसे ऐप्स का इस्तेमाल करना ही बेहतर समझा था, जो फोनपे जैसी कंपनी को ऊंचाइयों पर ले जाने में काफी ज्यादा मददगार साबित हुआ.

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