सिर्फ 300 रुपये से शुरू की थी कंपनी, आइडिया जोरदार था; आज खड़ी कर दी 7000 करोड़ रुपये की कंपनी

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शुरुआत चाहे जैसी भी हो, लेकिन अगर आप में कुछ करने का जज्बा हो तो आप छोटी से छोटी शुरुआत को भी बड़ा बना सकते हैं. आज की कहानी भी एक ऐसी ही कंपनी के बारे में है जिसने मात्र ₹295 से शुरुआत की और खुद को एक बेहतरीन कंपनी बना लिया, और एक छोटे से घर से शुरू हुई यह कंपनी 60 से ज्यादा देशों में अपने लाजवाब बिस्किट और डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए जानी जाती है.

हम बात कर रहे हैं ब्रिटानिया की, जो हम सभी के बीच एक बहुत ही जानी-मानी कंपनी है, जिसकी शुरुआत कई दशक पहले हुई थी.
लेकिन एक कमरे से शुरू करके इस कंपनी ने अपने उत्पादों के जरिए 60 से ज्यादा देशों में कैसे राज किया आज हम यही जानने वाले है.

लेकिन इसकी उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम दर के कारण, यह बाजार में बहुत तेजी से फैलने लगा और फिर बाद में जब भारतीय लोगों ने आजादी के लिए जबरदस्त लड़ाई शुरू की. तब ब्रिटिश व्यवसायी ने एक भारतीय को कंपनी बेचना सही समझा और गुप्ता ब्रदर्स ने ब्रिटानिया को खरीद लिया.

और इसमें मुख्य हिस्सेदार का नाम नलिन चन्द्र गुप्ता, हालांकि, 1918 तक, गुप्ता ब्रदर्स ने कंपनी को बड़े पैमाने पर ले जाने के लिए अंग्रेजी व्यवसायी सीएच हाम्स को भागीदार बना लिया. और फिर यहां से कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

क्योंकि सी.एच. के आने के बाद 1924 में ब्रिटानिया ने मुंबई में भी एक और फैक्ट्री खोली. और अब जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे, कंपनी भी तेजी से प्रसिद्ध होती जा रही थी, और फिर कुछ साल बाद जब विश्व युद्ध 2 शुरू हुआ, तब अचानक से बिस्कुट की मांग बहुत तेजी से बढ़ी.

यही कारण था कि ब्रिटानिया को अपनी बिक्री बढ़ाने में काफी मदद मिली. और इस दौरान कंपनी ने प्रोडक्शन के मामले में अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. और फिर जब 1947 में भारत आजाद हुआ इसके बाद भी कंपनी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती रही.

और बिस्किट सेगमेंट का अधिकांश बाजार हिस्सा अब ब्रिटानिया के पास था. और फिर इसी तरह 1979 में इसका नाम एक बार फिर से ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड में बदल दिया गया हालांकि इस कंपनी का मालिकाना हक कई बार बदला, लेकिन इस वजह से इसे कई जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा था.

राजन पिल्लई की मृत्यु के बाद, ब्रिटानिया का पूरा नियंत्रण नुस्ली वाडिया के पास चला गया और इसी तरह कंपनी को कई दशकों तक कई विवादों से भी जूझना पड़ा है. मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो कंपनी हर साल 27 फीसदी की दर से बढ़ रही है. और ये आंकड़े स्पष्ट रूप से कंपनी की सफलता को दर्शाते हैं.

एक छोटे से कमरे से शुरू होकर जिस तरह ब्रिटानिया आज 60 से ज्यादा देशों में फैल चुकी है हमें इससे सीख लेनी चाहिए कि अगर आप सच्चे रास्ते पर चलेंगे तो आपको सफलता जरूर मिलेगी.

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